जब भी विवाह की बात आती है, तो हम अक्सर देखते हैं कि लोग केवल ‘गुण मिलान’ (Gun Milan) पर भरोसा करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपको कोई एक विशेष लड़का या लड़की ही क्यों पसंद आती है? किसी को देखते ही आपके दिमाग में ‘घंटी’ क्यों बजती है? हम सोचते हैं कि यह उसकी खूबसूरती या बुद्धिमानी की वजह से है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसका कारण कुछ और ही है। यह ग्रहों का खेल है। इस लेख में हम जानेंगे कि गुण मिलान के अलावा वो कौन से गहरे ज्योतिषीय नियम हैं जो एक सफल शादी के लिए अनिवार्य हैं।
आकर्षण का ज्योतिषीय कारण: चंद्र, शुक्र और मंगल

किसी व्यक्ति के प्रति हमारा तीव्र आकर्षण या खिंचाव तीन मुख्य ग्रहों के ‘सुपर इम्पोज़’ (एक-दूसरे पर प्रभाव) होने से तय होता है: चंद्र, शुक्र और मंगल।
- चंद्रमा: यह मन का कारक है। जब दो लोगों का चंद्रमा मिलता है, तो वे भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं।
- शुक्र (Venus): यह शारीरिक आकर्षण और सुंदरता का ग्रह है।
- मंगल (Mars): यह ‘फायर’ यानी ऊर्जा का प्रतीक है।
सबसे बेहतरीन स्थिति वह होती है जब ये तीनों ग्रह मिलते हैं। यानी आप मन से भी पसंद करें (चंद्र), शारीरिक रूप से भी आकर्षित हों (शुक्र) और आपकी ऊर्जा भी मेल खाती हो (मंगल)। कई बार हम देखते हैं कि लोग गलत व्यक्तियों के प्रति भी आकर्षित हो जाते हैं, यहाँ तक कि अपराधियों से भी शादी कर लेते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनके शुक्र और मंगल मिल रहे होते हैं, चाहे वह व्यक्ति समाजिक रूप से कितना भी बुरा क्यों न हो। इसलिए, केवल आकर्षण होना ही शादी की सफलता की गारंटी नहीं है।
सप्तम भाव: वैवाहिक जीवन की नींव
आकर्षण के बाद हमें यह देखना होता है कि क्या यह रिश्ता टिकेगा? इसके लिए हम कुंडली का सप्तम भाव (7th House) और सप्तमेश (7th Lord) देखते हैं। यदि सप्तमेश कुंडली में छठे, आठवें या बारहवें भाव में बैठा हो, तो यह शुभ नहीं माना जाता।
इसके अलावा, यदि सप्तम भाव पर पापी ग्रहों (मलेफिक प्लेनेट्स) जैसे शनि, मंगल, राहु या केतु का भारी प्रभाव हो, तो शादी में सुख नहीं मिलता। ऐसे व्यक्ति को शादी में बहुत खराब अनुभव हो सकते हैं या शादी टूटने का खतरा भी रहता है। विशेषकर यदि छठे, सातवें, आठवें, दूसरे और बारहवें भाव में पाप ग्रह हों, तो वे शादी पर एक ‘प्रेशर’ बनाते हैं।
ज्योतिष का एक नियम है—समानता। यदि लड़का और लड़की दोनों का ही सप्तम भाव खराब है, तो भी मैं शादी के लिए ‘हाँ’ कर देता हूँ। क्योंकि अगर दोनों के भाग्य में संघर्ष है, तो वे साथ निभा लेंगे। लेकिन, यदि एक की कुंडली बहुत अच्छी है और दूसरे की बहुत खराब, तो ऐसे विवाह से बचना चाहिए। हमें किसी को अंधेरे में नहीं रखना चाहिए।
आयु और उपपद मिलान (Upapada Matching)
शादी पक्की करने से पहले कुछ तकनीकी पहलुओं की जांच बहुत ज़रूरी है। सबसे पहले है आयु (Longevity)। मान लीजिए पति-पत्नी में बहुत प्यार है, सब कुछ अच्छा है, लेकिन शादी के दो साल बाद ही किसी एक की मृत्यु हो जाए, तो दूसरे का जीवन बर्बाद हो जाएगा। इसलिए, दोनों की आयु का विचार करना अत्यंत आवश्यक है।
इसके बाद आता है ‘उपपद लग्न’ (Upapada Lagna)। उपपद 12वें भाव के स्वामी (Lord) की स्थिति से निकाला जाता है। 12वें भाव का स्वामी अपने घर से जितनी दूर है, उसे उतना ही और आगे ले जाने पर उपपद आता है। यह शादी के लिए प्रमुखता से जिम्मेदार है। हम देखते हैं कि यदि मेरे उपपद में राहु है, और सामने वाले के उपपद में भी राहु है, तो यह दोष कट जाता है (It is OK)। लेकिन उपपद पर शुभ ग्रहों का होना सबसे अच्छा माना जाता है।
संतान और वंश वृद्धि
अंत में, भारतीय परंपरा में विवाह का एक उद्देश्य वंश को आगे बढ़ाना भी है। इसके लिए स्त्री और पुरुष की कुंडली में अलग-अलग ग्रहों को देखा जाता है:
- लड़के के लिए: हम शुक्र (Venus) की स्थिति देखते हैं। शुक्र यह बताता है कि लड़के में संतान उत्पन्न करने की क्षमता (Potency) और अपना गोत्र आगे बढ़ाने की शक्ति है या नहीं।
- लड़की के लिए: हम बृहस्पति (Jupiter) को देखते हैं। गुरु ‘संतान कारक’ होता है, इसलिए लड़की के चार्ट में गुरु का अच्छा होना ज़रूरी है ताकि वह संतान को जन्म (Deliver) दे सके।
इन सभी प्रक्रियाओं—आकर्षण, सप्तम भाव, आयु, उपपद और संतान योग—को जाँचने के बाद ही अंत में ‘गुण मिलान’ किया जाता है। गुण मिलान शुरुआत नहीं, बल्कि अंत है।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- सच्चा आकर्षण तब होता है जब कुंडली में शुक्र, चंद्र और मंगल का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है।
- सप्तम भाव में शनि, राहु, केतु जैसे पाप ग्रहों का प्रभाव शादी को तोड़ सकता है।
- यदि एक साथी की कुंडली बहुत अच्छी और दूसरे की बहुत खराब हो, तो विवाह नहीं करना चाहिए।
- ‘उपपद लग्न’ का मिलान विवाह की स्थिरता (Stability) के लिए अनिवार्य है।
- विवाह से पहले दोनों की आयु (Longevity) अवश्य देखनी चाहिए।
- संतान के लिए लड़के का शुक्र और लड़की का गुरु (बृहस्पति) देखा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. हमें किसी अनजान व्यक्ति से अचानक खिंचाव क्यों महसूस होता है?
यह शुक्र, चंद्र और मंगल के ‘सुपर इम्पोज़’ होने के कारण होता है। जब ये ग्रह दोनों की कुंडली में मिलते हैं, तो तगड़ा आकर्षण पैदा होता है।
2. क्या दोनों की कुंडली खराब होने पर भी शादी हो सकती है?
हाँ, वीडियो के अनुसार, यदि दोनों का ही सप्तम भाव खराब है, तो शादी हो सकती है क्योंकि दोनों का प्रारब्ध (Destiny) एक जैसा है और वे एक-दूसरे को समझ पाएंगे।
3. उपपद लग्न क्या है?
12वें भाव के स्वामी को जब हम उतनी ही दूरी पर आगे ले जाते हैं, तो उसे उपपद कहते हैं। यह शादी के सुख को देखने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक है।
4. संतान सुख के लिए कौन से ग्रह देखे जाते हैं?
लड़के के चार्ट में शुक्र (क्षमता के लिए) और लड़की के चार्ट में गुरु (संतान कारक होने के नाते) को देखा जाता है।
5. क्या गुण मिलान सबसे पहला चरण है?
जी नहीं, गुण मिलान इन सभी तकनीकी जांचों के बाद सबसे अंत में किया जाता है।
