जीवन में संतान का सही समय पर न होना इंसान के दुखों का एक बहुत बड़ा कारण बन जाता है। वैदिक ज्योतिष में, हम हर समस्या का निवारण किसी न किसी रूप में देखते हैं। हालांकि, किसी भी निवारण या उपाय को करने से पहले यह जान लेना बहुत ज़रूरी है कि आखिर यह समस्या किस वजह से उत्पन्न हो रही है। जड़ को समझकर ही सही इलाज संभव है।
कुंडली का पंचम भाव और संतान सुख
ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का जो पांचवां भाव (Pancham Bhava) होता है, वह मुख्य रूप से संतान से संबंध रखता है। दिलचस्प बात यह है कि इसी भाव को ‘पूर्व पुण्य भाव’ भी कहा गया है। इसलिए, आप अक्सर पाएंगे कि जहां कहीं भी यह कहा जाता है कि अमुक व्यक्ति के बच्चे बहुत अच्छे हैं या बच्चों ने बहुत नाम रोशन किया है, तो आम तौर पर लोग कहते हैं कि यह उनके पिछले जन्मों के अच्छे कर्मों का फल है।
इसका मुख्य कारण यह है कि जो पंचम भाव है, वही आपकी संतान का है और वही आपके पूर्व पुण्य का भी है। अतः, आपके पिछले कर्म और संतान सुख आपस में जुड़े हुए हैं।
शुभ और अशुभ ग्रहों का प्रभाव

संतान संबंधित समस्याएं तब आती हैं जब पंचम भाव का संबंध खराब या पापी ग्रहों से हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि शनि, राहु, केतु, मंगल या सूर्य जैसे ग्रहों का संबंध पंचम भाव से हो जाए, तो बाधाएं आती हैं।
विशेष रूप से, अगर राहु का संबंध पंचम भाव से हो जाए, तो कई बार यह देखा गया है कि व्यक्ति को संतान-विहीन रहना पड़ता है या संतान के विषय में बहुत कष्ट भोगने पड़ते हैं। दूसरी तरफ, अगर पंचम भाव का संबंध शुभ ग्रहों जैसे चंद्रमा, शुक्र, बुध या बृहस्पति से हो, तो जातक को संतान संबंधित समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। गौरतलब है कि यदि चंद्रमा (जो कि एक स्त्री ग्रह है) का संबंध हो, तो कन्या संतान अधिक हो सकती है। वहीं, अगर बुध जैसा ग्रह पंचम भाव में हो, तो कई बार जातक को जुड़वा बच्चे (Twins) होने की संभावना होती है।
बृहस्पति: संतान का कारक
जैसा कि हमने देखा, पंचम भाव स्थान है, लेकिन ‘बृहस्पति’ (Jupiter) संतान का मुख्य कारक (Significator) है। ज्योतिष में बृहस्पति को उत्पत्ति का कारक माना गया है। यदि कुंडली में ऐसे योग हैं जो संतान उत्पत्ति में विलंब का कारण बन रहे हैं, तो भी एक मजबूत बृहस्पति आपको संतान सुख देने की क्षमता रखता है।
सोने की सलाई का उपाय: विधि
बृहस्पति को शुभ करने के लिए हम प्राचीन ज्ञान का सहारा ले सकते हैं। प्राचीन काल में बृहस्पति को ‘देव गुरु’ माना गया है और धातु के रूप में उन्हें ‘सोने’ (Gold) के साथ जोड़ा गया है। आयुर्वेद में ‘स्वर्ण भस्म’ का जिक्र आता है, जिसमें ऐसी क्वालिटीज होती हैं जो मेल और फीमेल दोनों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए अच्छी होती हैं।
उपाय करने का तरीका
यह एक मेडिकल और लॉजिकल उपाय है जिसे आप घर पर कर सकते हैं:
- सोने की सलाई (Gold Stick): सबसे पहले आपको सोने की एक स्टिक या सलाई बनवानी है। इसकी चौड़ाई आप अपनी क्षमता अनुसार ले सकते हैं।
- समय: यह उपाय आपको सुबह के समय करना है जब आप दूध का सेवन करते हैं।
- गर्म करें: अपनी गैस ऑन करें और उस सोने की स्टिक को आग पर तब तक गर्म करें जब तक वह ‘लाल सुर्ख’ न हो जाए।
- दूध में डालें: लाल होने के तुरंत बाद उस स्टिक को अपने दूध के गिलास में डाल दें (बुझा दें)।
- दोहराएं: एक गिलास दूध के लिए इस प्रक्रिया को लगभग 7 से 11 बार दोहराएं।
इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप, सोने के तत्व (जो बृहस्पति का रूप हैं) आपके दूध में आ जाएंगे। दूध, जो कि चंद्रमा को रिप्रेजेंट करता है, और बृहस्पति वह ग्रह है जो चंद्रमा की राशि (कर्क) में आकर उच्च का होता है। इसलिए, यह उपाय मेडिकल टर्म्स में भी चाइल्ड बर्थ के लिए सहायक साबित होता है। धीरे-धीरे आप पाएंगे कि आपको इस समस्या से निजात मिल रही है।
महत्वपूर्ण बातें (Key Takeaways)
- पंचम भाव संतान और पूर्व पुण्य (पिछले कर्मों) का भाव है।
- राहु, शनि और मंगल जैसे पापी ग्रह संतान सुख में बाधा डालते हैं।
- बृहस्पति संतान का मुख्य कारक ग्रह है।
- पंचम भाव में बुध होने से जुड़वा बच्चों की संभावना होती है।
- सोने की सलाई का उपाय आयुर्वेद और ज्योतिष के तर्क पर आधारित है।
- दूध (चंद्रमा) और सोना (बृहस्पति) का मिलन संतान योग को प्रबल करता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों पर आधारित है। यह केवल शैक्षिक और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए है। लेख में बताए गए उपाय को पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य स्थिति के संबंध में हमेशा एक योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।
